स्नातं तेन सर्व तीर्थम् दातं तेन सर्व दानम् कृतो तेन सर्व यज्ञो.....उसने सर्व तीर्थों में स्नान कर लिया, उसने सर्व दान दे दिये, उसने सब यज्ञ कर लिये जिसने एक क्षण भी अपने मन को आत्म-विचार में, ब्रह्मविचार में स्थिर किया।
Do Japa of any God's Name, 1st 4 minutes in lips, then 2 minutes in throat, then 2 minutes in heart, then do nothing for 2 minutes, be silent. If done 3-4 times daily this 10 minutes course, one will fly in spiritual journey. -Pujya Bapuji

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दीपावली Deepawali

Rajesh Kumawat | 9:45 AM | Best Blogger Tips

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कार्तिक मास में स्नान की महिमा

कार्तिक मास में सूर्योदय से पहले स्नान करने से स्नान तीर्थ स्नान के समान होता है l साथ ही अगर कोई व्यक्ति, कार्तिक के पूरे महीने ये पुण्य स्नान ना कर सके, तो कार्तिक मास के आखिरी तीन दिन (त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूनम) को भी अगर सूर्योदय से पूर्व स्नान करता है, तो उसे पूरे मास के पुण्य स्नान का फल होता हैl
कार्तिक मास में यह बातें करनी चाहिए (बहुत लाभ होता है) -  
तुलसीजी की मिट्टी का तिलकतुलसी के पौधे को सुबह एक- आधा  ग्लास पानी देना एक मासा सुवर्ण दान का फल देता है , तुलसी का वन अथवा तुलसी के पौधे लगाना हीतकारी है |
गंगाजी का स्नान, अथवा तो प्रभात का स्नान (सूर्योदय के पूर्व)ब्रह्मचर्य का पालन, चटोरापन न हो| धरती पर शयन...
उड़द , मसूर  आदि भारी चीज़ो का त्याग करना चाहिएतिल का दान करना चाहिए..कार्तिक मास में सत्संगसाधु संतों  का जीवन चरित्र का अध्ययन, मार्गदर्शन का अनुसरण करना चाहिएमोक्ष प्राप्ति का इरादा बना देना चाहिए
       कार्तिक मास में अपने गुरुदेव का सुमिरन करते हुए जो   "  नमो  नारायणाय " का जप करता है,उसे बहुत पुण्य होता है |

परम पूज्य सदगुरुदेव lar Jh vklkjketh ckiw  द्वारा गत वर्षों में दिवाली के समय बताई गयी कुछ बातें –
1. पूजा के स्थान पर मोर-पंख रखने से लक्ष्मी-प्राप्ति में मदद मिलती है.
2. तुलसी के पौधे के आगे शाम को दिया जलाने से लक्ष्मी वृद्दि में मदद मिलती है; गुरुदेव ने यह भी कहा की लक्ष्मीजी को कभी तुलसीजी नहीं चढाई जाती, उनको कमल चढाया जाता है |
3. आवले के उबटन से स्नान करने से लक्ष्मी प्राप्ति होती है
4. मिट्टी के कोरे दीयों में कभी भी तेल घी नहीं डालना चाहिए। दीये 6 घंटे पानी में भिगोकर रखें, फिर इस्तेमाल करें। नासमझ लोग कोरे दीये में घी डालकर बिगाड़ करते हैं।
5. दीपावली के दिन लौंग और इलाइची को जलाकर राख कर दें; उस से फिर गुरुदेव (की फोटो) को तिलक करें; लक्ष्मी-प्राप्ति में मदद मिलती है |
6. दीवाली के दिनों मे घर के मुख्य दरवाजे पर हल्दी और चावल की पावडर से ओमकार और स्वास्तिक बनाये। घर मे निरोगता और प्रसन्नता रहेगी|
7. दीपावली की संध्या को तुलसी जी के निकट दिया जलायें, लक्ष्मीजी को प्रसन्न करने में मदद मिलती है; कार्तिक मास में तुलसीजी के आगे दिया जलाना पुण्य-दाई है, और प्रातः-काल के स्नान की भी बड़ी भारी महिमा है |
8. दीपावली, जन्म-दिवस, और नूतन वर्ष के दिन, प्रयत्न-पूर्वकसत्संग सुनना चाहिए |
9. दीपावली की रात का जप हज़ार गुना फल-दाई होता है; ४ महा-रात्रियाँ हैं - दिवाली, शिवरात्रि, होली, जन्माष्टमी - यह सिध्ध रात्रियाँ हैं, इन रात्रियों का अधिक से अधिक जप कर के लाभ लेना चाहिए |
10. दीपावली के अगले दिन , नूतन वर्ष होता है, उस दिन, सुबह उठ कर थोडी देर चुप बैठ जाएँ; फिर, अपने दोनों हाथों को देख कर यह प्रार्थना करें:  
कराग्रे वसते लक्ष्मी, कर-मध्ये च सरस्वती,
कर-मूले तू गोविन्दः, प्रभाते कर दर्शनं ||
अर्थात, मेरे हाथों के अग्र भाग में लक्ष्मी जी का वास है, मेरे हाथों के मध्य भाग में सरस्वती जी हैं; मेरे हाथों के मूल में गोविन्द हैं, इस भाव से अपने दोनों हाथों के दर्शन करता हूँ...
फिर, जो नथुना चलता हो, वही पैर धरती पर पहले रखें; दाँया चलता हो, तो ३ कदम आगे बढायें,  दांए पैर से ही | बाँया चलता हो, तो ४ कदम आगे बढायें, बाँए पैर से ही |

11. नूतन वर्ष के दिन जो व्यक्ति हर्ष और आनंद से बिताता है, उसका पूरा वर्ष हर्ष और आनंद से जाता है
12. वर्ष के प्रथम दिन आसोपाल (अशोक के पत्ते ) के और नीम के पत्तों का तोरण लगायें और वहां से गुजरें तो वर्षभर खुशहाली और निरोगता रहेगी 

श्री सुरेशानंदजी ने कहा है-
1. दीपावली के दिन रात भर घी का दिया जले सूर्योदय तक, तो बड़ा शुभ माना जाता है |
2. दिवाली की  रात को चाँदी की  छोटी कटोरी या दिए में कपूर जलने से दैहिक दैविक और भौतिक परेशानी/कष्टों से मुक्ति होती है|
3. हर अमावस्या को (और दिवाली को भी) पीपल के पेड़ के नीचे दिया जलाने से पितृ और देवता प्रसन्न होते हैं, और अच्छी आत्माएं घर में जनम लेती हैं |
4. दीपावली की शाम को अशोक वृक्ष के नीचे घी का दिया जलायें, तो बहुत शुभ माना जाता है |
5. दिवाली की  रात गणेशजी को लक्ष्मी जी के बाएं रख कर पूजा की  जाये तो कष्ट दूर होते हैं
6. दिवाली के दिनों में अपने घर के बाहर सरसों के तेल का दिया जला देना, इससे गृहलक्ष्मी बढ़ती हैं ।
7. दिवाली की रात प्रसन्नतापूर्वक सोना चाहिये 
8. थोड़ी खीर कटोरी में डाल के और नारियल लेकर के घूमना और मन में "लक्ष्मी- नारायण" जप करना और खीर ऐसी जगह रखना जहाँ किसी का पैर ना पड़े और गायें, कौए आदि खा जाएँ और नारियल अपने घर के मुख्य द्वार पर फोड़ देना और इसकी प्रसादी बाँटना । इससे घर में आनंद और सुख -शांति रहेगी ।
9. दीपावली की रात मुख्य दरवाजे के बाहर दोनों तरफ १-१ दिया गेहूँ के ढेर पे जलाएं और कोशिश करें की  दिया पूरी रात जले| आपके घर सुख समृद्धि की वृद्धि होगी|
10. दिवाली के दिन अगर घर के लोग मिलकर 5-5 आहुति डालते हैं तो घर में सुख सम्पदा रहेगी । लक्ष्मी का निवास स्थाई रहेगा 
11. दिवाली के दिनों में चौमुखी दिया जलाकर चौराहे पर रख दिया जाए, चारों तरफ, वो शुभ माना जाता है । 
12. नूतन वर्ष के दिन (दीपावली के अगले दिन) गाय के खुर की मिट्टी से, अथवा तुलसीजी की मिट्टी से तिलक करें, सुख-शान्ति में बरकत होगी|

भूत प्रेत से रक्षा -
दिवाली के दिन सरसों के तेल का या शुध्द घी का दिया जलाकर काजल बना लेये काजल लगाने से भूत प्रेत पिशाच, डाकिनी से रक्षा होती हैऔर बुरी नजर से भी रक्षा होती है-9/11/2007,Kotda
काली चौदस को सरसों के तेल/घी का दिया जलाकर काजल बनाकर लगाने से नजर नहीं लगती, नेत्र ज्योति बढ़ती है और भूत-बाधा भाग जाती है।

माँ लक्ष्मी मन्त्र :-  
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दिवाली के दिन स्फटिक की  माला से इन मन्त्रों के  जप करने से लक्ष्मी आती हैं -
ॐ महालक्ष्मऐ नमः ,    ॐ विष्णुप्रियाऐ नमः ,   $ ¸ÉÓ xɨÉ:          

दीपावली पर लक्ष्मी प्राप्ति की सचोट साधना विधियाँ –
1.      धनतेरस से आरम्भ करें –
सामग्री – दक्षिणावर्ती शंख, केसर, गंगाजल का पात्र, धूप, अगरबत्ती, दीपक, लाल वस्त्र ।
विधि – साधक अपने सामने गुरुदेव या लक्ष्मी जी की फोटो रखें तथा उनके सामने लाल रंग का वस्त्र (रक्त कन्द) बिछाकर उस पर दक्षिणावर्ती शंख रख दें । उस पर केशर से सतिया बना लें तथा कुमकुम से तिलक कर दें । बाद में स्फटिक की माला से मंत्र की सात मालायें करें । तीन दिन ऐसा करना योग्य है । इतने से ही मंत्र साधना सिद्ध हो जाती है । मंत्र जप पुरा होने के पश्चात लाल वस्त्र में शंख को बाँधकर घर में रख दें । जब तक वह शंख घर मे रहेगा, तब तक घर में निरंतर उन्नति होती रहेगी।
मंत्र- ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं महालक्ष्मी धनदा लक्ष्मी कुबेराय मम गृह स्थिरो ह्रीं ॐ नमः ।
2.      दीपावली से आरम्भ करें –
दीपावली पर लक्ष्मी प्राप्ति की साधना का एक अत्यंत सरल एवं त्रिदिवसीय उपाय यह भी है कि दीपावली के दिन से तीन दिन तक अर्थात भाई दूज तक स्वच्छ कमरे में धूप, दीप, व अगरबत्ती जलाकर शरीर पर पीले वस्त्र धारण करके, ललाट पर केशर का तिलक कर, स्फटिक मोतियों से बनी माला नित्य प्रातः काल निम्न मंत्र की दो दो मालायें जपें -

ॐ नमः भाग्य लक्ष्मी च विद् महेः । अष्टलक्ष्मी च धीमहि । तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात ।

( दीपावली लक्ष्मी जी का जन्मदिवस है । समुद्र मंथन के दौरान वे क्षीरसागर से प्रकट हुई थी, अतः घर में लक्ष्मी जी के वास,दरिद्रता के विनाश और आजीविका के उचित निर्वाह हेतु यह साधना करने वाले पर लक्ष्मी जी प्रसन्न होती है। )

दिवाली मे प्रसन्न रहे -
·         दिवाली के दिवस , धन तेरस को दीप उत्सव के साथ ध्यान रखे की दिवाली के दिनों में दिनभर प्रसन्न, उल्हासित , आनंदित रहना है
·         उन दिनों में शांत हो के अच्छी तरह से प्राणायाम करे….शाम को सूर्य अस्त के पहले मन में गुरु मन्त्र जप के प्राणायाम करना है ….कुम्भक कर के श्वास अन्दर रोक के गुरुमंत्र जपे और छोड़ते समय बाहर फूंक मारनी है…….ऐसे १० से १५ करो..ऐसा करने से चित्त में भगवत प्रसाद-जा कण बनेंगे.. मन प्रसन्न रहेगा॥
·         ॐ नमो नारायणाय ..सर्व समर्थ्यम लक्ष्मी नारायण.. ऐसे चिंतन कर के हँसते हँसते नींद में जाना है ॥  
·         दिवाली को रात को सूर्यास्त के समय श्वास अन्दर भर के ॐ शान्ति५ बार जप कर के फूंक मार के बाहर छोड तो रोग, चिंता और कटु स्वभाव को बाहर छोड़ दो….सूरज के किरण हो तब करना
·         १० /१५ बार करो दिवाली के शाम को ऐसा करो..और रात को सो जाओ तो लक्ष्मी जी विचरण करती है इसलिए लक्ष्मी -नारायण  ऐसे जपोश्वास अन्दर जाए तो  शान्तिबाहर आए तो एकश्वास अन्दर जाए तो  आनंदश्वास बाहर आए तो.. ऐसे अपने दिल में भगवान की भक्ति जगाते सो जाना…. ऐसा कर के सोयेंगे , सुबह उठेंगे तो वर्ष का प्रथम दिन सुख-शान्ति में जायेगा तो वर्ष भर आनंद में जायेगा   

दीपावली पूजन का शास्त्रोक्त विधान
कार्तिक मास में दीपदान का विशेष महत्व है । श्री पुष्कर पुराण में आता है :-
तुलायाँ तिलतैलेन सायंकाले समायते ।
आकाशदीपं यो दद्यान्मासमेकं हरिं प्रति ॥
महती श्रियमाप्नोति रूपसौभाग्यसम्पदम ॥
जो मनुष्य कार्तिक मास में सन्ध्या के समय भगवान श्री हरी के नाम से तिल के तेल का दीप जलाता है, वह अतुल लक्ष्मी, रूप सौभाग्य, और सम्पत्ति को प्राप्त करता है । नारद जी के अनुसार दीपावली के उत्सव को द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, अमावस्या और प्रतिपदा – इन पांच दिनों तक मानना चाहिये । इनमें भी प्रत्येक दिन अलग अलग प्रकार की पुजा का विधान है ।

गोवत्स द्वादशी - कार्तिक मास की द्वादशी को गोवत्स द्वादशी कहते हैं । इस दिन दूध देने वाली गाय को उसके बछड़े सहित स्नान कराकर वस्त्र ओढाना चाहिये, गले में पुष्पमाला पहनाना , सिंग मढ़ना, चन्दन का तिलक करना तथा ताम्बे के पात्र में सुगन्ध, अक्षत, पुष्प, तिल, और जल का मिश्रण बनाकर निम्न मंत्र से गौ के चरणों का प्रक्षालन करना चाहिये ।

क्षीरोदार्णवसम्भूते सुरासुरनमस्कृते ।
सर्वदेवमये मातर्गृहाणार्घ्य नमो नमः ॥
(समुद्र मंथन के समय क्षीरसागर से उत्पन्न देवताओं तथा दानवों द्वारा नमस्कृत, सर्वदेवस्वरूपिणी माता तुम्हे बार बार नमस्कार है।)
पूजा के बाद गौ को उड़द के बड़े खिलाकर यह प्रार्थना करनी चाहिए-
सुरभि त्वं जगन्मातर्देवी विष्णुपदे स्थिता ।
सर्वदेवमये ग्रासं मया दत्तमिमं ग्रस ॥
ततः सर्वमये देवि ºÉ´ÉÇnäù´Éè®ú±ÉRÂóEÞòiÉä                          
   मातर्ममाभिलाषितं सफलं कुरू नन्दिनी ॥
(हे जगदम्बे ! हे स्वर्गवसिनी देवी ! हे सर्वदेवमयि ! मेरे द्वारा अर्पित इस ग्रास का भक्षण करो । हे समस्त देवताओं द्वारा अलंकृत माता ! नन्दिनी ! मेरा मनोरथ पुर्ण करो।) इसके बाद रात्रि में इष्ट , ब्राम्हण , गौ तथा अपने घर के वृद्धजनों की आरती उतारनी चाहिए।
धनतेरस - कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन को धनतेरस कहते हैं । भगवान धनवंतरी ने दुखी जनों के रोग निवारणार्थ इसी दिन आयुर्वेद का प्राकट्य किया था । इस दिन सन्ध्या के समय घर के बाहर हाथ में जलता हुआ दीप लेकर भगवान यमराज की प्रसन्नता हेतु उन्हे इस मंत्र के साथ दीप दान करना चाहिये-
मृत्युना पाशदण्डाभ्याम्  कालेन श्यामया सह ।
त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम ॥
(त्रयोदशी के इस दीपदान के पाश और दण्डधारी मृत्यु तथा काल के अधिष्ठाता देव भगवान देव यम, देवी श्यामला सहित मुझ पर प्रसन्न हो।)
नरक चतुर्दशी -  नरक चतुर्दशी के दिन चतुर्मुखी दीप का दान करने से नरक भय से मुक्ति मिलती है । एक चार मुख ( चार लौ ) वाला दीप जलाकर इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिये –
दत्तो दीपश्वचतुर्देश्यां नरकप्रीतये मया ।
चतुर्वर्तिसमायुक्तः सर्वपापापनुत्तये  ॥
(आज नरक चतुर्दशी के दिन नरक के अभिमानी देवता की प्रसन्नता के लिये तथा समस्त पापों के विनाश के लिये मै चार बत्तियों वाला चौमुखा दीप अर्पित करता हूँ।)
यद्यपि कार्तिक मास में तेल नहीं लगाना चाहिए, फिर भी नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर तेल-मालिश (तैलाभ्यंग) करके स्नान करने का विधान है। 'सन्नतकुमार संहिता' एवं धर्मसिन्धु ग्रन्थ के अनुसार इससे नारकीय यातनाओं से रक्षा होती है। जो इस दिन सूर्योदय के बाद स्नान करता है उसके शुभकर्मों का नाश हो जाता है। -

दीपावली - अगले दिन कार्तीक अमावस्या को दीपावली मनाया जाता है । इस दिन प्रातः उठकर स्नानादि करके जप तप करने से अन्य दिनों की अपेक्षा विशेष लाभ होता है । इस दिन पहले से ही स्वच्छ किये गृह को सजाना चाहिये । भगवान नारायण सहित भगवान लक्ष्मी जी की मुर्ती अथवा चित्र की स्थापना करनी चाहिये तत्पश्चात धूप दीप व स्वस्तिवाचन आदि वैदिक मंत्रो के साथ या आरती के साथ पुजा अर्चना करनी चाहिये । इस रात्रि को लक्ष्मी भक्तों के घर पधारती है ।

अन्नकूट दिवस / गोवर्धन-पूजा - पांचवे दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को अन्नकूट दिवस कह्ते है । धर्मसिन्धु आदि शास्त्रों के अनुसार गोवर्धन-पूजा के दिन गायों को सजाकर, उनकी पूजा करके उन्हें भोज्य पदार्थ आदि अर्पित करने का विधान है। इस दिन गौओ को सजाकर उनकी पूजा करके यह मंत्र करना चाहिये, गौ-पूजन का मंत्र
लक्ष्मीर्या लोकपालानां धेनुरूपेण संस्थिता ।
घृतं वहति यज्ञार्थ मम पापं त्यपोहतु ॥
(धेनु रूप में स्थित जो लोकपालों की साक्षात लक्ष्मी है तथा जो यज्ञ के लिए घी देती है , वह गौ माता मेरे पापों का नाश करे । रात्री को गरीबों को यथा सम्भव अन्न दान करना चाहिये । इस प्रकार पांच दिनों का यह दीपोत्सव सम्पन्न होता है ।)

दुर्भाग्य को सौभाग्य मे बदले -
दिवाली में गरीब बच्चों को एक-एक टुकड़ा मिठाई का बाँट कर आयेंगे तो बच्चों की दुआ निकलेगी, वो दुआएं अपने दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल देंगे।  - पूज्य ckiw th

मिठाइयो से सावधान - मिठाइयों पर जो चाँदी के वर्ख लगते हैवो भी बैलों के आतों  का उपयोग कर के बनाए जाते है …सावधान
बाजार में बेसन की मिठाई मिलती.. तो बेसन ४० रुपये किलो है और चावल का आटा १८ रुपये किलो ..तो मिठाई दोनों को मिक्स कर के बनाते तो और भी सत्यानाश है…..अभी 36 हज़ार किलो नकली मावा पकड़ा गया बीकानेर में
मावे की मिठाइयाँ, अथवा जो भी व्हरायटीयाँ है मावे से बनने वाली आगे  चल के बहोत  नुकसान करती है..सीधा दूध , लस्सी ये तो फायदा  करता है..लेकिन दूध में से जो व्हरायटीयाँ बनती है जैसे पनीर , रसगुल्ले आदि नुकसान करते है..
आप का शरीर स्वस्थ रहे इसलिए मिठाइयों को नपे तुले ढंग से उपयोग में लाना बाजारू मिठाई से सावधान रहे.. नपी-तुली खाना

पटाखों से जलने पर  - पटाखों से जलने पर जले हुए स्थान पर कच्चे आलू के पतले पतले चिप्स काट कर रख दें या आलू का रस लगा दें । और कुछ ना लगाये । इससे १-२ घंटे में आराम हो जायेगा । अथवा तो सर्व गुण तेल से भी आराम होता है ।  


देव-जगी एकादशी को आरती - दीपावली के बाद आने वाली देव-जगी एकादशी के दिन, संध्या के समय कपूर आरती करने से आजीवन अकाल-मृत्यु से रक्षा होती है; एक्सीडेंट, आदि उत्पातों से रक्षा होती है|

दिवाली का सन्देश : अध्यात्मिकरण से परम के साथ स्नेह




दिने  दिने  नवम नवम l
नमामी नंद नंदनम ll
सूर्य पुराण पुरुषोत्तम हैफिर भी सूर्य का नित्य नवीन उल्हास आनंद बरसाने वाला वातावरण मिलता है  चंद्रमाँ  लाखों वर्ष पुराना हैलेकिन नित्य  नविन  रस देता है..ऐसे ही सत्संग परब्रम्‍ह परमात्मा की कथा सत्संग वार्ता, संत दर्शन दिने  दिने  नवम नवम ! नमामी नंद नंदनम !!

अब दिवाली  आ रही है…2-4 बातें ध्यान में रखना
1 )स्वामी विवेकानंद ने कहा है की मिठाई वाले की दुकान साक्षात यमदूत की दुकान हैअगर विवेकानंद इस युग में होते तो और कोई कड़क नाम खोजतेक्यों की इस युग में काजू कतरी में और महेंगी मिठाइयों पर जो वर्ख लगते है वो और पहेले चाँदी सस्ती थी तब भी जो चाँदी के वर्ख लगते वो भी बैलों के आतों  का उपयोग कर के बनाए जाते थेऐ  छि  छि ….मरे हुए जानवरों के आँतों का उपयोग कर के चाँदी का वर्ख लगेये तो असली चाँदी सस्ती थी तब की बात है..अब तो असली चाँदी महेंगी हो गयी तो नकली क्या क्या चीज़े डालते जो घातक है ऐसी मिठाई दीवाली में खाने से ज़रा बच के रहे
2) मावे की मिठाई खाने में सावधानआज कल मावा कैसे बनता है आप  देखोगे तो मावे की मिठाई मोफत  में भी नही लोगे….दूध में से क्रीम निकाल देते फिर उस का पाउडर बना देते..वो पाउडर 90 से 100 रूपीए किलो तक बिकता है ..वो पाउडर में अढाई  से 3 किलो पानी डाल के उस को बड़ा बना के फिर मावा बनाते है तो डेढ़ किलो (1.5  KG) मावा बन जाता है..अभी 36 हज़ार किलो नकली मावा पकड़ा गया बीकानेर में
ये सब जान कर दीवाली में दीवाला निकालने वाली ग़लतियाँ मेरे साधकों की निकल जाए ये सोच कर  मुझे तो अच्छा लग रहा  है ….
तो मावे की मिठाइयाँ, अथवा जो भी व्हरायटीयाँ है मावे से बनने वाली आगे  चल के बहोत  नुकसान करती है..सीधा दूध , लस्सी ये तो फायदा  करता है..लेकिन दूध में से जो व्हरायटीयाँ बनती है जैसे पनीर , रसगुल्ले आदि नुकसान करते है..
सीधे चावल तो फ़ायदा करते है लेकिन चावल में से इडली डोसा बनाते तो सत्यानाश करते, तबीयत को बिगाड़ते
ऐसे ही सीधा मैदा ठीक  है लेकिन बेकरी में जा  कर आथा  लगता है तो फिर बिस्किट  , डबल रोटी आदि पेट के लिए मुसीबत बनती है
आप का शरीर स्वस्थ रहे इसलिए मिठाइयों को नपे तुले ढंग से उपयोग में लाना
मावे से , पनीर की सब्जी से,  रसगुल्लों से , काजू कतरी  से , बादाम कतरी  से थोड़ा  मुँह घुमा के दर्पट हो जाना(बच जाना )  …    

3 ) ना करे नारायण लेकिन दीवाली के दिनों में फटाकड़ो से कइयों के बेचारों के हाथ , पैर अथवा शरीर दाह से , अग्नि से आक्रांत हो जाता हैआप के यहा तो ना होलेकिन कहीं ऐसा हुआ तो आप के साथ में एक महा डॉक्टर साथ में ले जाओकैसा भी जल गया हो, पूरा शरीर जल गया हो अथवा कोई अंग जला हो तो क्या करे की कच्चे आलू के चिप्स कर के जले हुए अंग पर बिछा  दो..1-2 घंटे में ही आराम हो जाएगाकोई दवाई की ज़रूरत नही..अथवा तो आलू के टुकड़े कर के पानी डाले बिना मिक्सी   में उस का रस निकालो और वो रस जले हुए अंग पर लगा दो…1-2 घंटे में आराम हो जाएगा… 

दिवाली  में 4 काम होते है
1) घर की दुकान की साफ सफाई की जाती हैतो ये लौकिक दिवाली के साथ आप की अध्यात्मिक दिवाली भी हो..जैसे घर की साफ सफाई की जाती है ऐसे अपने दिल की साफ सफाई भी कर ले तो रोज दिवाली होगीक्या साफ सफाई रखे ? की सासू से, देरानी से , बहू से, जेठानी से, पड़ोसी से कुछ  खट्टा मीठा व्यवहार हो गया हो तो उसे निकाल के दिल को दिलबर के प्रेम से भर दे ये बाहर की सफाई के साथ दिल की सफाई हैआप की रोज दिवाली मनेगी !   
2) दूसरा क्या करते की हम घर में नयी चीज़ लाते है..बर्तन नये लाते , गहेने नये लाते, कपड़े नये लाते ..और तो क्या झाड़ू बुहारी की चीज़े भी नयी ले आते की चलो दिवाली  हैतो ऐसे अपने  जीवन में नयी चीज़े लाओ….क्या नयी चीज़ लाना है ? की अब हम संसार के सुख के पिठ्ठू  नही होंगे, लोलुप नहीं होंगेसंसार के दुख से हम दुखी नहीं होंगे सुख से सुखी नही होंगे..दोनो का उपयोग कर के परम आनंदित होंगे ऐसी नयी चीज़ लाएँगे….तो सुख भी आता है तो उदार बनाने के लिए , सुख बाटने के लिए और दुख भी आता है तो वैराग्यवान और सावधान बनाने के लिएजो ज़्यादा खाते, देर से खाते तो बीमार होते..तो बीमारी का दुख आया..तो जल्दी खाओ, कम खाओज़्यादा मीठा खाते तो डाईबिटीस का दुख आया तो आधा किलो करेले पैरों तले कुचलों  10 दिन और डाईबिटीस को भगाओ और दुबारा नहीं आए इसलिए मिठास पे नियंत्रण रखोतो कोई भी दुख आया तो आप को विवेकवान , वैराग्यवान  और साधनवान  बनाने के लिए आता है दुख…. 
आप दुख के भोगी मत बनो..दुख का भोगी बनेगा तो दुख नही मिटेगा ..दुखियारे का दुख तब तक रहेता है जब तक दुखी ग़लती करता रहेता हैदुखी ग़लती करना निकाल दे तो दुख कभी आता ही नही..आएगा तो भी आप को दुखी नही कर सकेगा! शर्मिंदा  होके चला जाएगा!! ..दुख तब तक जीवित है जब तक दुखी की ग़लती चालू है..दुखी अगर ग़लती निकाल दे तो दुख कभी उस को दुबारा दबा नही सकेगा…. आ के लज्जित होके चला जाएगा..और सुख की लोलूपता तब तक रहेती है जब तक सुख भोगी उस का सही उपयोग नही करतासुख भोगी अगर सुख का सही उपयोग करे तो सुख उस को लंपटु नही बनाएगाऔर दुख भोगी दुख को सही उपयोग करे तो दुख उस को दबाएगा नही
आप दुख और सुख का सही उपयोग करो ये चीज़ लाना आप के जीवन में..
3) तीसरी चीज़ होती है की रोशनी करते है दिवाली में ..घरों में दुकानों में प्रकाश करते है..तो आप के जीवन में ज्ञान  का प्रकाश होसुख भोग की चीज़ नही है, सुख दूसरों को बाटने की चीज़ है ये ज्ञान  पक्का रखोदुख भोग की चीज़ नही है, दुख सावधान होने की चीज़ है..तो सुख और दुख दोनो साधन बन जाएँगे..तो आप साध्य तक आराम से पहुँच जाएँगे..साध्य क्या है ? साध्य है तुम्हारा आत्मातुम्हारा परमात्मा ..तुम्हारा वास्तविक परम सुहुर्द, परम हितेशी, परम कल्याणकारी तुम्हारा साध्य है
कोई आदमी ये सोच ले की मैं  चुनाव लडूं  और जीत जाउंगा  तो सुखी हो जाउंगा ’…… तो वो ग़लती में है…. ‘मैं शादी करूँ ,बच्चे हो जाएँगे..आराम से बड़ी नोकरी मिलेगी..मैं सुखी हो जाउंगा’ ..सोचे तो भारी ग़लती करता है… ‘दुश्मन की टाँग टूटेगी, दुश्मन हार जाएँगे..जेल में जाएँगे तो मैं सुखी हो जाउंगा’  ..सोचनेवाला बिल्कुल ग़लती करता हैसमाज की कोई चीज़ पा कर , बना कर, बिगाड़ कर कोई सुखी होना चाहता है तो समझ लो की उस को पागलपन  का भूत लगा है
तो तीसरी चीज़ है ज्ञान  के प्रकाश में रहे..ये मिल गया, वो मिल गया , वो हट गया.. फिर क्या?
 बोले  जॉब नही मिलती बड़ा दुखी हूँ’ …तो जोबर (जॉब वाले) सुखी हो गये क्या?….
 ‘बेटा नही है तो दुखी हूँ’….तो बेटावाले सुखी हो गये क्या?
… ‘दुश्मन मर जाए, हट जाए तो मैं सुखी हो जाऊं’…. तो जिन के दुश्मन नही वो सुखी हो गये क्या?
बाहर की परिस्थिति से मैं सुखी हो जाउंगा  ये बेवकूफी निकालने का उजाला तुम्हारे जीवन में होना चाहिएये प्रकाश तुम्हारे जीवन में होना चाहिए
हिरण्यकश्यपू ने 60 हज़ार वर्ष तपस्या कीऐसी तपस्या  की ताकद  की सोने की हिरण्यपूर बनाई ..हिरण्य  माना सोनाउस का नाम भी हिरण्यकश्यपू थारावण ने भी सोने की लंका बनाई….अभी जो नेता भाषण करते है की हम ये कर देंगे वो कर देंगे’  ये सब बबलू नेताओं को याद रखना चाहिए की रावण ने अपनी प्रजा के लिए जितना कर दिखाया था उतना कोई धरती का नेता आज नहीं कर सकता हैसोने के घर थे रावण की प्रजा के पास!..कोई नेता दे सकता है क्या अपनी प्रजा को सोने के घरऔर इस से भी ज़्यादा रावण प्रजा पालन में कितना कुशल था जब रावण की अंतिम घड़ियाँ आई तो राम जी गंभीर स्वर में बोले की,  ‘आज धरती से महान पंडित , बुध्दिमान  प्रजा पालक राजा, विदा हो रहा है’ …
लक्ष्मण ने पुछा  की, ‘प्रभुजी आप ये क्या कहेते है? उस ने तो माँ  सीता का अपहरण किया धूर्त बन करऔर आप उस को प्रजा पालक, बुध्दिमान  राजा धरती से जा  रहा ऐसा आप गंभीर स्वर में कहे रहे हैप्रभु मुझे समझ में नही आता..
लखन इस जघन्य कार्य के सिवाय उस के जीवन में बहोत  कुछ  था..जाओ तुम उन से उपदेश लो…’
रावण को लोग लताड़ते है, लेकिन रावण में जो खूबिया थी, वो आज के किसी राजा में हो तो पूजा जाएगाकिसी वैज्ञानिक  में हो तो अमर हो जाएगा….लक्ष्मण गये उपदेश लेने को..रावण कुछ  नही बोला….ऐसा नही कहा की मेरी मौत लाने वाले के भाई क्यू इधर आए..और आए हो तो सीर पर खड़े हो..शरम नही आती उपदेश लेने ..कुछ  अकल है?… ऐसा रावण ने नही कहाकितना गंभीर है!कितनी रावण के पास सूझ बुझ है..रावण ने कुछ  नही कहा..लखन ने 1-2 बार कहा..रावण चुप रहा..
श्री रामचंद्रजी के पास लखन लौट आए की उपदेश नही दियाश्री रामचंद्रजी  बोले , ‘तुम कहा खड़े रहे थे?’
लखन बोले, ‘उन के नज़दीक..उन के सीरहाने पर ..
तो सीर पे चढ़ के उपदेश लिया जाता है की चरणों में बैठ कर? भूल तुम्हारी हैजाओ रावण के चरण के तरफ खड़े रहो …’
लखन जैसे व्यक्ति को राम जी रावण के चरणों  के तरफ खड़ा करते ..आप क्या समझते?…रावण कोई ऐसा ही है क्या?
लक्ष्मण रावण के चरणों  की तरफ खड़ा रहा.. हे लंकेश..आप का प्रजा पालक का सदगुण आप का विद्वत्ता का सदगुण श्री रामचंद्रजी ने कहा है ..आप जा  रहे तो ..मैं  थोड़ा  कष्ट देना चाहता हूँथोड़ा  उपदेश दे दीजिए…’
रावण बोला, ‘हा हा..वीर  लक्ष्मण लो..ऐसा नही की मेरे बेटे के हत्यारे लक्ष्मणऐसा नही बोले.. वीर  लक्ष्मणबोले..कितना सदगुण हैहै किसी के नेता के पास की अपने बेटे की हत्या करने वाले को प्रेम से कहे वीर !
रावण बोला, ‘मेरे पास 4 योजनाए थीएक तो समुद्र को खरास रहीत करना है …’  
है कोई विज्ञानी  पूरे समुद्र को मीठा बनाने की योजना जिस के पास हो
रावण आगे  बोला, ‘मेरे पास ऐसी योजना थी की आम आदमी स्वर्ग में जा  सके उस का नाम मैने स्वर्ग की सीढ़ियाँ योजना रखा थाचंद्रमा कलंक रहीत हो ये मेरी तीसरी योजना थीपूनम का चाँद जितना फायदा  कर सकता है उस की कौन गिनती कर सकता है?..तो सदा चंद्रमा पूनम का ही दिखे ऐसी मैं व्यवस्था करने वाला था..
है किसी विज्ञानी  की ऐसी सोच? रावण कितना भारी विद्वान था और ये सब प्रजा के लिए कर रहा था..
और चौथी योजना थी की अग्नि कही भी जलाओ, धुवे बिना अग्नि हो.. ( धुवा पोल्यूशन  पैदा करता है) ..लेकिन मैं अच्छे  काम को महत्व ना देकर मनोरंजन के पीछे  फिसल गयामेरे जीवन का सार ये है की अच्छा काम करने में पूरा ध्यान देना चाहिए ..मनोरंजन और फालतू समय बिगाड़ने से सावधान  नही हुआ तो मेरे जैसे की भी ये दुर्गति होती है तो दूसरे की क्या बात है…’
कितना भारी उपदेश दिया है !
आइंस्टीन   (प्रसिध्द  वैज्ञानिक ) मरते समय विल कर गया , वो पुस्तक के रूप में छपाया    गया.. आइंस्टीन  लिखता है .. हे मेरे भगवान ! मुझे थोड़ा  समय और देता तो मैं भारत के संतों  के पास जाता..अणु -परमाणु की खोज के बाद भी कुछ  खोज बाकी रहे जाती है..वो खोज जिस से होती है उस आत्मा की खोज कर  के मैं मुक्तामा  हो जातामहान आत्मा हो जातामुझे थोड़ा  टाइम और देते भगवान ..ओह माय  God   !…आइंस्टीन  के पास जिंदगी का समय तो था नही, उस समय ये समझ आई.. तो आइंस्टीन   भी जिस चीज़ के लिए झटपटाता है  वो चीज़ भारत की एक अनपढ़ कन्या ने पाकर दिखा दियाउस कन्या का नाम था शबरी
जो रावण सोने की लंका बना चुका था, उड़ने की विद्या थी, रूप बदलने की विद्या थी..जिस के सीर कट जाए तो सीर लग जाए, हाथ कट जाए तो नये हाथ लग जाए ऐसा वरदान  होने के बाद भी रावण की अपेक्षा शबरी भीलन ज़्यादा फ़ायदे में है..ये सत्संग की बलिहारी है!
तो सत्संग हमें ज्ञान  का प्रकाश देता है..जैसा शबरी भीलन के जीवन में ज्ञान  का प्रकाश हुआ..मीरा बाई  के जीवन में ज्ञान  का प्रकाश हुआ शाण्डिली, स्वयंप्रभा और अनेक कन्याओं ने जो सत्संग से पाया वो हिरण्यकश्यपू ने और रावण ने 60 हज़ार वर्ष तपस्या कर के भी नही पाया
इसलिए मैं  आप सभी को फिर से बधाई देता हूँ की 60 हज़ार वर्ष तपस्या करो, प्रजा को सोने के घर बना दो, हिरण्यकश्यपू के जैसे एक नज़र से हीरे मोती, धन धान्य    दे दो; फिर भी उन को वो चीज़ नही मिलती जो दिवाली  का अध्यात्मीकरण से हाथोहाथ मिलेगी
मरने के बाद वाली नही; यहीहमें यही मिली है..
4) चौथी चीज़ है मिठाई खाना और खिलाना दिवाली  मेंतो आप भी मधूमय  रहो, सुख मे रहो, प्रसन्न रहो और आप के संपर्क में आने वाले भी मधूमय  और प्रसन्न हो जाएये मिठाई खाना और खिलाना है
तो दिवाली  के  4 काम : सफाई करना, नयी चीज़ लाना, दिए जलाना और मिठाई खाना-खिलाना  ..इस का अध्यात्मिक करण समझ लिया..
दूसरो तक सत्संग पहुँचाना ये बड़ी सेवा है..आप किसी को खाना दे दो, नोकरी  दे दो..फिर भी उस के जीवन में कुछ  फरियाद और कंगालियत रहेगीअगर सत्संग दे दोगे तो देर सबेर आसुमल में से आशाराम  बन जाते

गदाधर  पुजारी ऐसी पूजा करते एकाकार होके की माँ  काली प्रगट हो जाती ..और एक दिन काली माँ  ने गदाधर को कहा की तुम तोतापुरी   गुरु से सत्संग लोदीक्षा लो.. गदाधर बोले : मैय्या तुम्हारा दर्शन होता है..तुम मेरे पर प्रसन्न हो, मेरे हाथ का गजरा लेती हो..मेरे हाथ का भोजन करती हो..फिर मुझे गुरु करने की क्या ज़रूरत है?
काली माँ  ने कहा : ये भावना से तो मैं प्रगट होती हूँ..तुम्हारी आत्मा हूँ बाहर आ जाती हूँ..लेकिन भावना के परे 5 शरीर हैये अन्न-मय  शरीर..उस के अंदर प्राण-मय  शरीर..प्राण-मय  शरीर निकल जाता तो आदमी मर जाता है..प्राणमय  शरीर है लेकिन मनोमय  शरीर सो जाता है तो आदमी मुर्दे के नाई पड़ा है, श्वास चल रही हैमनोमय शरीर के अंदर विज्ञानमय  शरीर है जो बुध्दी  तत्व वाला हैउस के अंदर आनंदमय  शरीर है..उस के अंदर तुम होये ज्ञान  गुरु के बिना नही होगा
गदाधर! मूर्ति की पूजा से भावना के अनुसार थोड़ा  फल मिलता है.. मूर्ति संकल्प नही करती.. लेकिन संत तुम्हारे हित  का संकल्प करतेमूर्ति तुम्हारी घड़ाई  नही करती गदाधर, संत तुम्हारी घड़ाई  भी करते हैमूर्ति तुम्हारे से अलग ढंग से पैदा हुई..और अलग ढंग से मूर्ति का विसर्जन होगालेकिन संत तुम्हारी नीति से पैदा हुए और तुम्हारी नाई खाते, पीते, बोलते, चलते है..वो जैसे उँचाई को पार कर सके ऐसे तुम भी उन उँचाई को पार कर सकते हो..मूर्ति किसी उँचाई को पार कर के साक्षात्कार नही करती….इसलिए जाओ गुरु के पास..राम जी आए तो गये गुरु की शरण..कृष्ण आए तो गुरु की शरण गये..तो तुम नीगुरे क्यो रहोगे? जाओ गदाधर तोतापुरी  गुरु से दीक्षा लो..जब डांटते  हुए माता ने कहा तो  गदाधर पुजारी तोतापुरी  के शिष्य बने..और गुरु की कृपा से जो राम को आत्मसाक्षातकार हुआ, जो कृष्ण को आत्म साक्षात्कार  हुआ ऐसे तोतापुरी  गुरु की कृपा से गदाधर को भी आत्मसाक्षात्कार हुआ..गुरु जी ने प्रसन्न हो कर गदाधर को राम कृष्ण परम हंस कहे दिया!

ऐसे ही लीलाशाह प्रभुजी ने आसुमल नाम के लड़के को कहे दिया की आशा तो एक राम की और आश्-निराश उस आसुमल को आशाराम बना कर करोड़ो लोगों के सामने धर दिया…  :)  (श्री सद्गुरुदेव जी भगवान की महा जयजयकार हो! )..ये सत्संग  की बलिहारी है..मूर्ति की बलिहारी नही है…   इसलिए कहते है की :-
एक घड़ी आधी घड़ी आधी में पुनी आध l
तुलसी संगत साधु की हरे कोटि अपराध ll
सुख देवे दुख को हरे, करे पाप का अंत l
कहे कबीर वो कब मिले परम स्नेही संत ll
  

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