वो कौन सा परम रहस्य है ? जो रामकृष्ण को काली से, नामदेव को विट्ठल से और पार्वती को भगवान शिव से मिला !
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गुरुकृपा ही केवलं शिष्यस्य परं मंगलम्। गुरु की कृपा ही शिष्य का परम मंगल कर सकती है, दूसरा कोई भी नहीं कर सकता है यह प्रमाण वचन है। प्र...
अमृतवर्षा की रात्रि : शरद पूर्णिमा 11 अक्टूबर 2011
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कामदेव ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा कि " हे वासुदेव ! मैं बड़े-बड़े ऋषियों, मुनियों तपस्वियों और ब्रह्मचारियों को हरा चुका हूँ। मै...
आत्म-साक्षात्कार की कुँजियाँ
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भगवान के प्यारे भक्त दृढ़ निश्चयी हुआ करते हैं। वे बार-बार प्रभु से प्रार्थना किया करते हैं और अपने निश्चय को दुहराकर संसार की वासन...
चतु:श्लोकी भागवत
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ब्रह्माजी द्वारा भगवान नारायण की स्तुति किए जाने पर प्रभु ने उन्हें सम्पूर्ण भागवत-तत्त्व का उपदेश केवल चार श्लोकों में दिया था। ...
नवधा भक्ति
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संत श्री तुलसीदास जी रचित राम चरित मानस में शबरी से भेंट प्रसंग के समय श्री राम अपनी नवधा भक्ति के लक्षण उन्हें बताते हैं॥ श्री र...
जन्माष्टमी का संदेश !
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श्रीकृष्ण ऐसे महान नेता थे कि उनके कहने मात्र से राजाओं ने राजपाट का त्याग करके ऋषि-जीवन जीना स्वीकार कर लिया। ऐसे श्रीकृष्ण थे फिर ...
संत-सान्निध्य और संत सेवा का फल
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संतसेवा का फल तैलंग स्वामी बड़े उच्चकोटि के संत थे। वे 280 साल तक धरती पर रहे। रामकृष्ण परमहंस ने उनके काशी में दर्शन किये तो बोलेः ...
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