आत्म-साक्षात्कार की कुँजियाँ
›
भगवान के प्यारे भक्त दृढ़ निश्चयी हुआ करते हैं। वे बार-बार प्रभु से प्रार्थना किया करते हैं और अपने निश्चय को दुहराकर संसार की वासन...
चतु:श्लोकी भागवत
›
ब्रह्माजी द्वारा भगवान नारायण की स्तुति किए जाने पर प्रभु ने उन्हें सम्पूर्ण भागवत-तत्त्व का उपदेश केवल चार श्लोकों में दिया था। ...
नवधा भक्ति
›
संत श्री तुलसीदास जी रचित राम चरित मानस में शबरी से भेंट प्रसंग के समय श्री राम अपनी नवधा भक्ति के लक्षण उन्हें बताते हैं॥ श्री र...
जन्माष्टमी का संदेश !
›
श्रीकृष्ण ऐसे महान नेता थे कि उनके कहने मात्र से राजाओं ने राजपाट का त्याग करके ऋषि-जीवन जीना स्वीकार कर लिया। ऐसे श्रीकृष्ण थे फिर ...
संत-सान्निध्य और संत सेवा का फल
›
संतसेवा का फल तैलंग स्वामी बड़े उच्चकोटि के संत थे। वे 280 साल तक धरती पर रहे। रामकृष्ण परमहंस ने उनके काशी में दर्शन किये तो बोलेः ...
जिसके ध्यान से ब्रह्माजी, भगवान विष्णु एवं साम्बसदाशिव भी सामर्थ्य एवं अनोखा आनंद पाते हैं
›
भारत देश के ऋषियों ने जो अदभुत खोजें की हैं, वैसी खोजें विश्व में कहीं भी नहीं हुई हैं। मनुष्य का स्वभाव तीन गुणों के प्रभाव से संचालित ह...
संतो और भक्तो को सताना ठीक नहीं- संत श्री आशारामजी बापू
›
संतश्री आशारामजी आश्रम संत श्री आशारामजी बापू मार्ग साबरमती अमदावाद-५ संपर्क-०७९३९३८७७७८८,०७९२७५०५०१०,११ प्रेस नोट ...
करेगा जो गफलत तो खायेगा लात
›
मनुष्य जब माँ के गर्भ में होता है तो प्रार्थना करता है कि ' हे प्रभु ! तू मुझे इस दुःखद स्थिति से बाहर निकाल ले , मैं ते...
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें