नूतन वर्ष का नूतन सन्देश : 4 अप्रेल : गुडी पड़वा
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ॐ मधुमन्मे निक्रमणं मधुमन्मे परायणम्। वाचा वदामि मधुमद् भूयासं मधुसंदृशः।। ' हे मधुमय प्रभो ! आपकी प्रेरणा से सामने उपस्थित योग...
ब्राह्मी स्थिति क्या है ?
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आपकी श्रद्धा जिस इष्टदेव में हो, भगवान में हो, देवी-देवता में हो या सदगुरुदेव में हो, जिसे आप खूब स्नेह करते हो, आदर करते हो, पूजन करते हो...
और इटावा का डिप्टी कलेक्टर खटखटा बाबा बन गया !
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ब्रिटिश शासन के जमाने की बात है। इटावा में सप्रू साहब डिप्टी कलेक्टर थे। उनका चाकर था मनहर नायी। एक रात भोजन करके सप्रू साहब पलंग पर आरा...
सत्संग से एक सामान्य कीड़ा महान् मैत्रेय ऋषि बन गया !
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तुलसीदास जी महाराज कहते हैं – एक घड़ी आधी घड़ी आधी में पुनि आध। तुलसी संगत साध की हरे कोटि अपराध।। एक बार शुकदेव जी के पिता भगवान वेद...
हम तो खाली तीसरी पढ़े हैं - "ज्यों केले की पात पात में पात. त्यों संतन की बात बात में बात "
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( श्री सुरेशानंदजी की अमृतवाणी ) पुराने सत्संगी जो हमेशा आते रहते है शिविरों में, उनको पता है कि बापूजी कई बार बोलते रहते...
पुरुषार्थ क्या है?
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ऐ मनुष्यदेह में सोये हुए चैतन्यदेव ! अब जाग जा। अपने को जान और स्वावलम्बी हो जा। आत्म-निर्भरता ही सच्चा पुरुषार्थ है। जब तुम अपनी सहायत...
ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी उससे आलिंगन करके मिलते हैं !
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तुम निर्भयतापूर्वक अनुभव करो कि मैं आत्मा हूँ । मैं अपनेको ममता से बचाऊँगा । बेकार के नाते और रिश्तों में बहते हुए अपने जीवन को बचाऊँग...
भगवान के दर्शन से मोह हो सकता है लेकिन सत्संग से मोह दूर होता है !
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मनुष्य में इतनी सम्भावनाएँ हैं कि वह भगवान का भी माता-पिता बन सकता है। दशरथ-कौशल्या ने भगवान राम को जन्म दिया और देवकी-वसुदेव भगवान श्रीकृ...
परम शांति के आगे, इन्द्र का वैभव भी कुछ नहीं
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जिनके जीवन में आत्मशांति प्राप्त करने की रूचि व तत्परता है, वे इस पृथ्वी के देव ही हैं। देव दो प्रकार के माने जाते हैं- एक तो स्वर्ग में र...
आत्म-साक्षात्कार जब तक नहीं होता तब तक धोखा ही धोखा है
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ब्रह्मज्ञान सुनने से जो पुण्य होता है वह चान्द्रायण व्रत करने से नहीं होता । ब्रह्मज्ञानी के दर्शन करने से जो शांति और आनंद मिलता है...
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