Gurukripa hi Kevlam ! : Followers of Param Pujya Sant Shri Asaram Ji Bapu

जो शुद्ध ब्रह्म है, वही मैं हूँ !

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वंशे सदैव भवतां हरिभक्तिरस्तु। आपके कुल में सदैव हरिभक्ति बनी रहे।  आपका यह नूतनवर्ष आपके लिए मंगलमय हो। ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ     ...

जब तक और तब तक

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जब तक तुम्हें अपना लाभ और दूसरे का नुकसान सुखदायक प्रतीत होता है, तब तक तुम नुकसान ही उठाते रहोगे। जब तक तुम्हें अपनी प्रशंस...

आपमें और ईश्वर में क्या दूरी है ?

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यह ईश्वरीय विधान है कि मार खाकर भी आदमी को सुधरना पड़ता है। डण्डे खाकर भी सुधरना पड़ता है और अगर मर गये तो नर्कों में जाकर या इतर यो...

रामायण का तात्विक अर्थ

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पाप का फल ही दुख नहीं है । पुण्यमिश्रित फल भी विघ्न है । ऐसा कौन सा इंसान है जिसको  संसार में विघ्न नहीं है।  तो भगवान महा पापी होंगे इस...

प्रतीति को प्राप्ति मत समझो

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प्रसादे सर्वदुःखानां हानिरस्योपजायते। प्रसन्न चेतसो ह्याशु बुद्धिः पर्यवतिष्ठते।। " अन्तःकरण की प्रसन्नता होने पर इसके ...

आत्मसाक्षात्कार- भगवान के दर्शन से भी ऊँचा

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http://hariomgroup.org/aatmsakshatkar_divas.html   आत्मसाक्षात्कार करना ही मनुष्य जीवन का एकमात्र उद्देश्य है। जीव, जगत (स्थूल जगत,...

संगति करें यदि संत की

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'हे पुत्र ! इस देहाध्यास ने तुझे चिर काल से बाँध रखा था। अब ॐकार का गुँजन करके देहाभिमान को भगाकर आत्म-अभिमान को जगा दे। काँट...

तू पाँच भूतों का पुतला नहीं है....

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जो लोग सिंध में रहते थे और विदेशों में जाकर कमाते थे उनको सिंधवर्की कहा जाता था। सिंधवर्की खूबचन्द अपनी पत्नी, माँ बाप को छोड़कर ...

आत्मसुख की झलक

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अष्टावक्र जी कहते हैं- सुखी होने के लिए कुछ करना नहीं है, केवल जानना है। कोई मजदूरी करने की जरूरत नहीं है। केवल चित्त की विश्रांति...। च...

साधक के हृदय में भी आत्मज्ञान के फूल खिलें

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जिन्ह हरि कथा सुनी नहीं काना। श्रवण रंध्र अहि भवन समाना।। जे न करहिं रामगुन गाना। जीह सो दादुर जीह समाना।।   जिनक...
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