Gurukripa hi Kevlam ! : Followers of Param Pujya Sant Shri Asaram Ji Bapu

काँटे से काँटा निकालो

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जगत के जो महान पुरूष हो गये हैं, जो सादे रहे हैं, जिन्होंने बड़ी-बड़ी हवेलियाँ नहीं बनायी, बड़े-बड़े मकान नहीं बनाये, जो अपनी आवश्यकताएँ कम ...

खुदाताला ज्यादा सिफारिश किसकी मानता है?

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सिक्खों के सातवें गुरू हररायदासजी महाराज ज्ञान में इतने निपुण कि हँसते-हँसते भक्तों के चित्त को पढ़ लेते और हँसते-हँसते उनके प्रश्नों के उत...

कोई अकल मस्त, कोई शक्ल मस्त

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जो लोग आपको ईश्वर के मार्ग ले जाते हैं वे ही लोग आपको रोकेंगे, यदि आपकी साधना की गाड़ी ने जोर पकड़ा तो। अगर वे लोग नहीं रोकते अथवा उनके रोकन...

असली 'मैं' का साक्षात्कार !

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जप, तप, व्रत, उपवास, ध्यान, भजन, योग आदि साधन अगर सत्संग के बिना किये जायें तो उनमें रस नहीं आता। वे तो साधन मात्र हैं। सत्संग के बिना वे व...

वेदान्त का सत्संग-प्रसाद

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जिन्हीं हरि कथा सुनी नहीं काना। श्रवण रंध्र अहि भवन समाना।। जे न करहिं रामगुन गाना। जीह सो दादुर जीह समाना।। जिनके कानों ने हरिकथा नहीं...

उत्तम भूषण और उत्तम तीर्थ क्या है ?

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किं भूषणाद् भूषणमस्ति शीलम् तीर्थं परं किं स्वमनो विशुद्धम्। किमत्र हेयं कनकं च कान्ता श्राव्यं सदा किं गुरूवेदवाक्यम्।। 'उत्तम-से-उत्तम...

जब रावण ने कर चुकाया (शील का प्रभाव)

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रावण के जमाने में एक बड़े सदाचारी, शील को धारण करने वाले राजा चक्ववेण हुए। बड़ा सादा जीवन था उनका। राजपाट होते हुए भी योगी का जीवन जीते थे। ...
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