अनन्य योग
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मयि चानन्ययोगेन भक्तिरव्यभिचारिणी। विवक्तदेशसेवित्वरतिर्जनसंसदि।। "मुझ परमेश्वर में अनन्य योग के द्वारा अव्यभिचारिणी भक्ति तथा एकान...
आत्मबल ही जीवन है
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आत्मबल ही जीवन है (पूज्य बापू जी के सत्संग प्रवचन से) रोग प्रतिकारक शक्ति कमजोर होती है तभी रोग पकड़ते हैं, विकार-प्रतिकारक शक्ति कमजोर...
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सो संगति जल जाये, जिसमें कथा नहीं राम की !!
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मूरख मन ! बात करे कल की, खबर नहीं पल की !!
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चिन्ता से निश्चिन्तता की ओर
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अन्तःकरण की दो धाराएँ होती हैं- एक होती है चिन्ता की धारा और दूसरी होती है चिन्तन की धारा, विचार की धारा। जिसके जीवन में दिव्य विचार नहीं...
भगवान का चिंतन मनन क्यों करें ?
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जहाँ भगवान का स्मरण चिन्तन होता है वह स्थान पवित्र माना जाता है। वहाँ के कण-कण में उस परमात्म-तत्त्व के परमाणु फैले रहते हैं। जो आदमी क्रोध...
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