ब्राह्मी स्थिति क्या है ?
आपकी श्रद्धा जिस इष्टदेव में हो, भगवान में हो, देवी-देवता में हो या सदगुरुदेव में हो, जिसे आप खूब स्नेह करते हो, आदर करते हो, पूजन करते हो उनकी मूर्ति, चित्र या फोटो अपने साधना-कक्ष में उचित जगह पर रखो। उनके सामने आसनस्थ होकर बैठ जाओ। उनके चरणों से लेकर मस्तक तक.... मस्तक से लेकर चरणों तक के अंगों को खूब प्रेमपूर्ण दृष्टि से निहारते रहो। फिर किसी भी एक अंग पर दृष्टि जमाकर त्राटक का अभ्यास करो। पलकें गिराये बिना निहारते रहो। निहारते-निहारते ठीक एकाग्रता हो जाय तो आँखें बन्द करके दृष्टि को भ्रूमध्य में, आज्ञाचक्र में एकाग्र करो। बाहर जिस मूर्ति या फोटो पर त्राटक किया था वह भीतर दिखने लगेगा। वृत्ति को एकाग्र करने में यह प्रयोग बहुत उपयोगी सिद्ध होगा।लेबल: alakh ki or
