और इटावा का डिप्टी कलेक्टर खटखटा बाबा बन गया !
इटावा में सप्रू साहब डिप्टी कलेक्टर थे। उनका चाकर था मनहर नायी। एक रात भोजन करके सप्रू साहब पलंग पर आराम कर रहे थे। मनहर पैर दबा रहा था। साहब बोलेः
"अरे मनहर ! कोई कहानी सुना।"
"साहब ! आपने तो बहुत किताबें पढ़ी हैं और कहानियाँ सुनी हैं। आप ही सुनाओ।"
"नहीं.....। तू कहानी सुना। मैं सोते सोते सुनुँगा।"
"वाह जी....! मैं कहानी सुनाऊँ और आप सोते रहें। मैं क्या ऐसे ही बकता रहूँ ?"
"नहीं... नहीं....। मैं चाव से सुनुँगा।"
"अच्छा, तो सुनो। लेकिन 'हूँ.... हूँ...'. करते रहना। मुझे पता रहे कि आप सुन रहे हैं। नहीं तो आप सो जायें और मैं सुनाता रहूँ तो मेरी शक्ति ऐसे ही व्यर्थ चली जायगी।"
लेबल: व्यास पूर्णिमा, Vyas purnima

